ओम सुप्रीम डिवाइनिटी,
ज्ञान और प्रकाश के दाता,
धार्मिकता के मार्ग पर मेरा मार्गदर्शन करो,
मुझे अज्ञानता में भटकने न दें।
सपनों, भय, दुःख, निराशा और दंभ के क्षेत्र में,
माया के नाटक, भ्रम को पहचानने में मेरी मदद करें,
क्या मैं ज्ञान के प्रकाश में ऊपर उठ सकता हूं,
अज्ञानता के अंधकार के आगे न झुकना।
झूठी पहचान की जंजीरों को तोड़ने में मेरी मदद करें,
मुझे आत्म-साक्षात्कार की सच्चाई की ओर ले जाइए,
इस यात्रा में, मुझे निराश नहीं होना चाहिए,
क्षणिक, सांसारिक भावनाओं की मृगतृष्णा से।
क्या मैं अपने अहंकार को आपकी ईश्वरीय इच्छा के हवाले कर दूं,
यह जानते हुए कि सब कुछ आपकी ब्रह्मांडीय योजना का हिस्सा है,
मुझे इस आत्मसमर्पण में ताकत खोजने दें,
अपने मानवीय रूप की सीमाओं को पार करते हुए।
मेरे डर का सामना करने की हिम्मत के साथ मुझे आशीर्वाद दें,
मेरे दुःख को गले लगाने के लिए, और निराशा से आगे बढ़ने के लिए,
क्या मैं दंभ को विनम्रता से बदल सकता हूं,
अपने सच्चे आत्म के ज्ञान में शांति पाना।
जीवन की इस यात्रा में, हर पल,
आत्मज्ञान की ओर एक कदम बनो,
क्या मैं जीवित रहूं, अज्ञानता में नहीं,
लेकिन आत्मज्ञान के आनंद में।
ओम शान्ति, शान्ति, शान्ति।
दैनिक मंत्र: “ओम नमो भगवते वासुदेवाय”
(अनुवाद: मैं अपने अंदर की परमात्मा को नमन करता हूं)
यह मंत्र हमारी दिव्य प्रकृति और अज्ञानता और भ्रम से ऊपर उठने की आवश्यकता की याद दिलाता है। इस इरादे को ध्यान में रखने के लिए इसे पूरे दिन दोहराएं।

